संवाददाता कुलदीप सिंह ठाकुर

बिलासपुर – जैसे ही कलेक्टर साहब की गाड़ी शिविर परिसर में रुकी, अधिकारियों के चेहरों पर हलचल साफ दिखने लगी। बिना किसी सूचना के पहुंचे ज़िले के कलेक्टर ने शिविर की एक-एक गतिविधि का जायजा लेना शुरू किया।

“आप लोग यहां जनसेवा के लिए बैठे हैं या खानापूर्ति के लिए?” – कलेक्टर साहब का यह सवाल जैसे शिविर में गूंज गया।

पटवारी की आंखें झुक गईं, तहसीलदार पसीना-पसीना हो गया। कलेक्टर ने स्पष्ट शब्दों में कहा – “सरकारी योजनाओं का लाभ अगर समय पर नहीं पहुंचेगा, तो आपकी जिम्मेदारी तय होगी। शिविर कोई औपचारिकता नहीं, जनता की उम्मीद है।”

निरीक्षण के बाद कलेक्टर ने मौके पर ही कुछ मामलों का निपटारा करवाया, साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि आगामी शिविरों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

यह निरीक्षण केवल एक कार्रवाई नहीं था, यह एक संदेश था — कि अब लापरवाही नहीं चलेगी। जनता के अधिकारों की रक्षा अब कड़ी निगरानी में होगी।

jitendra porte

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