प्रमुख मांग
कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने वाले कानून के सख्त पालन के साथ स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व अवकाश और पेंशन की मांग


बिलासपुर। महिला श्रमिकों के अधिकारों और कार्यस्थलों पर उनकी सुरक्षा को लेकर बिलासपुर में भारतीय मजदूर संघ की जिला इकाई ने जोरदार तरीके से आवाज उठाई। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर संगठन ने इस वर्ष 8 मार्च से 15 मार्च 2026 तक “महिला अधिकार सप्ताह” मनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों और महिला श्रमिकों ने प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपकर महिला श्रमिकों से जुड़ी समस्याओं और उनकी मांगों को प्रमुखता बताया।

 



संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि आज भी कारखानों, उद्योगों और अन्य कार्यस्थलों पर काम करने वाली महिलाओं को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। महिला श्रमिकों को कई जगहों पर समान काम के बावजूद पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है। इसे गंभीर असमानता बताते हुए संगठन ने समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने की मांग की है।

महिला श्रमिकों को यह भी कहना है..

कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। विशेष रूप से छोटे बच्चों वाली महिला श्रमिकों के लिए क्रैच यानी पालना घर की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें भारी परेशानी उठानी पड़ती है। ऐसे में सभी कारखानों, उद्योगों और संस्थानों में क्रैच की अनिवार्य व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है, ताकि महिलाएं अपने बच्चों की चिंता से मुक्त होकर काम कर सकें।



ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया..

कि महिला श्रमिकों के काम के समय का उचित निर्धारण किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें असुविधाजनक और असुरक्षित परिस्थितियों में काम न करना पड़े। संगठन ने कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग करते हुए कहा कि सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण हर महिला श्रमिक का अधिकार है।




संगठन ने महिला श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की मांग भी उठाई। ज्ञापन में सभी महिला श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा की सुविधा, मातृत्व अवकाश का अधिकार और पेंशन की गारंटी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। पदाधिकारियों का कहना था कि श्रमिक वर्ग की महिलाओं को रोजगार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा देना भी उतना ही जरूरी है।
भारतीय मजदूर संघ ने स्पष्ट किया कि महिला श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं से जुड़ी इन मांगों पर यदि जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में संगठन आंदोलन का रास्ता भी अपना सकता है। इस दौरान सनकी ओर से प्रमुख रूप से सुरेश तिवारी, संजय तिवारी समेत बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

jitendra porte

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